यूनिटी/एकता क्या है

एकता एक सामाजिक टूल 

एकता के बारीकियों को जाने 



एकता का शाब्दिक अर्थ एकरूपता से है। एकता शक्ति संजोने का एक सामाजिक टूल है। एकता कार्य करने की क्षमता, सोचने की क्षमता, और शक्ति बढ़ाने की क्षमता में एक्स्पोनेंशियल वृद्धि करता है। जब कोई एकता में होता है तो उनकी इंडिविजुअलिटी खत्म होकर के सामूहिकता का उत्पत्ति होती है। कहने का मतलब है कि जब हम एकता में होते है तो मेजॉरिटी में काम होता है। किसी व्यक्ति विशेष की इसमें नहीं चलती।
व्यक्तियों के बीच में आंतरिक सामंजस्य ही एकता है। एकता में दूसरे भागीदारों के प्रतिभाशाली प्रदर्शन को सराही वा स्वीकारी जाती हैं । यह मानें कि प्रत्येक व्यक्ति असाधारण प्रदर्शन दे सकता है। हम सभी ना केवल परस्पर ,बल्कि कार्य के प्रति भी निष्ठावान रहते हैं।

 दूसरे व्यक्तियों के साथ मेल जोल ही एकता है। हमारी बुनियादी आवश्यकताओं में से एक आवश्यकता यह है कि हम अपनेपन के भाव को अनुभव करें। स्वयं को एक समग्र का हिस्सा अनुभव कर सकें। हमें बिलकुल ही अच्छा नहीं लगता है कि हमें सारी दुनिया से काटकर अलग कर दिया जाए। हम बाहरी दुनिया के साथ अपना जुड़ाव रखना चाहते हैं। हम प्राकृतिक रूप से ही सामाजिक प्राणी है। और दूसरे व्यक्तियों व संस्कृतियों के विषय में कौतूहल भाव रखते हुए उनके प्रति हुए अन्याय व पीड़ा के प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार रखते हैं। हम परिवार के स्वाभाविक मेलजोल का हिस्सा बनना चाहते हैं। या किसी कार्य क्षेत्र या राजनीतिक दल के साथ मिलकर चलना भी पसंद करते हैं।हमें परस्पर बात करने एक दूसरे को समझने तथा मदद करने का अवसर मिलता है। देशों तथा अन्य व्यक्तियों पर भी यही बात लागू होती है। चेतना या अवचेतन रूप से हम सभी एक साथ मिलकर काम करना ही पसंद करते हैं। यह हमें इस योग्य बनाता है कि हम अपनी सीमित मांगों व इच्छाओं में से ऊपर उठें और एक साथ मिलकर असंभव को संभव कर दिखाने का सामूहिक साहस दिखा सकें। यदि संकल्प और इरादा पक्का हो तो एकता के बल पर बड़े से बड़ा काम भी सरल हो जाता है। एकता की महानता यही है कि इसमें प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान दिया जाता है। एकता से अस्तित्व का अनुभव प्राप्त होता है। कार्य के लिए उत्साह में वृद्धि होती है और सारा वातावरण शक्तिशाली व सक्षम हो जाता है।


हमारा शरीर एकता का बेहतरीन उदाहरण


एकता का सबसे अच्छा उदाहरण हमारे शरीर की कार्यप्रणाली है। हमारे शरीर में विशेष काम को करने के लिए विशेष अंग होता है। मुंह बोलने और खाने का काम करता है , नाक सूंघने का काम करता है, कान सुनने का काम करता है, आंख देखने का काम करता है, चलने का काम पैर करता है, कुछ भी चीज को पकड़ने या उठाने का काम हाथ करता है। यह तो बात हुई हमारे शरीर के बाहरी अंगों की जो हमें दिखाई देता है। इसी तरह से हमारे शरीर के आंतरिक हिस्सों में सैकड़ों या कहे तो हजारों ऐसे अंग है जो अपने-अपने काम में लगे हुए हैं। और इन सभी अंगों का एक ही उद्देश्य होता है, हमारे जीवन को सुचारू रूप से चलाना। एकता के द्वारा हम किसी बड़े काम को बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं। एकता का सबसे बड़ा सूत्र आपसी कोआर्डिनेशन और mutual understanding है। कोआर्डिनेशन जोड़ने का काम करता है और mutual understanding एक दूसरे के इंपॉर्टेंस को बताता है। एकता में हम सेंट्रल इंस्ट्रक्शन को फॉलो करते हैं।

भारत देश एकता का दूसरा नाम 

हमारा देश भारत बहुत बड़ा प्रजातांत्रिक देश है। हमारा देश भारत कल्चरल डायवर्सिटी का बहुत बड़ा हब है। दुनिया में भारत के जैसा डाइवर्सिटी किसी और देश में नहीं है। प्रत्येक राज्य अपने आप में अलग है। प्रत्येक जिले अलग हैं। तहसील अलग है। पंचायत अलग है।अगर टेक्निकली देखा जाए तो प्रत्येक गांव में कोई ना कोई ऐसी चीज जरूर होती है जो एक दूसरे को अलग करती है। हमारे देश के डाइवर्सिटी का सबसे नायाब नमूना यह है कि प्रत्येक नियत दूरी पर बोली या भाषा का लहजे में परिवर्तन होता है। भाषा बदलती है मान्यताएं बदलती है और कल्चर बदलता है और मौसम बदलता है। हमारा देेश बगीचे की फूल की तरह है। वह क्या चीज है जो पूरा देश uniformity में हैं। कितना सुन्दर इतना बड़ा हमारा देश चलता है। इसके पीछे का कारण हमारे देश के लोग हैं, या देश का संविधान। एकता के संबंध में हमारे देश के बारे में यहां पर वर्णन करने का सिर्फ एक ही कारण है । और वह कारण यह है कि जब भी हम एकता के सूत्र में बंधे होते हैं तो हमारा इंडिविजुअलिटी का लोप हो जाता है, हम और आप क्या हैं  , मायने नहीं रखता। यहां पर उत्पन्न होती है सामूहिकता। और सबका एक ही लक्ष्य और विज़न होता है।

एकता इनसे सीखें 



  • एकता का बेहतरीन नमूना जंगली कुत्तों और लकड़बग्घा में देखने को मिलती है। यह काफी चालाक और संगठित होते हैं। यह जानवर शिकार करने में विश्वास नहीं करते। यह हमेशा जंगल के बड़े और शक्तिशाली शिकारी जानवरों का पीछा करते हैं। जैसे कि शेर , चिते और बाघ। जैसे ही ने अंदेशा होता है कि इन जानवरों के द्वारा शिकार कर लिया गया है, तो अपने संख्या बल का उपयोग करते हुए उनके हाथ से शिकार को छीन लेते हैं। बेचारे शिकारी जानवर बड़े  खूंखार होने के बावजूद उनके एकता के समक्ष कुछ नहीं कर पाते।

  • एक छोटी काली चींटी जो वजन में मुश्किल से 1 माइक्रोग्राम से भी कम होता है। यह चींटी एकता में रहकर संगठित रूप से अपने से हजारों गुना बड़े खाने के सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सफल हो जाते हैं।

  • आपने यह कहानी तो जरूर सुनी ही होगी कि किस तरह से बुड्ढे पिता ने अपने बेटों को लकड़ी के सूखी गठरी का उपयोग करते हुए एकता के महत्व को समझाया था। अगर हम अकेले होते हैं तो आसानी से कोई भी हमें तोड़ सकता है। अगर हम संगठित होते हैं तो हमारा कोई भी बाल बांका नहीं कर सकता। एकता में हम एक दूसरे के लिए शक्ति बन जाते हैं।

  • इसी तरह से जब भूखे कबूतर दाने की लालच में आकर शिकारी के द्वारा बिछाई  जाल में फंस जाते हैं और डर से चिल्लाने लगते हैं। तब समझदार बुड्ढा कबूतर ने उनको एकता में बल होती है, के बारे में समझाया। सभी कबूतरों ने मिलकर जोर लगाया और जाल सहित उड़ गए। 

  • आप सबों ने झाड़ू को तो अवश्य ही देखा होगा। झाड़ू से अलग एक स्टिक की क्या औकात होती है। जब सभी स्टिक को आपस में मिलाकर बांध दिया जाता है तो एक झाड़ू का निर्माण होता है। झाड़ू में मौजूद स्टिक की संख्या के मुताबिक शक्ति का विस्तारण होता है। 

  • किस तरह से साइबेरियन पक्षी भोजन और प्रजनन के लिए हजारों हजार किलोमीटर की लंबी दूरी तय करते हैं। आखिर उन्हें इतनी ऊर्जा मिलती कहां से है। उन्हें ऊर्जा मिलती है यूनिटी से। प्रत्येक पक्षी एक दूसरे के लिए ऊर्जा स्रोत हैं।

  • हमारा देश यूनिटी के कमी के कारण ही अंग्रेजों का गुलाम हुआ था और यूनिटी ने ही हमारे देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाई।

  • समाज के वैसे संगठित समाज जिन्होंने एकता में रहकर अनेकों सामाजिक कल्याण के काम कर रहें हैं। अनेकों स्कूल, कॉलेज और अस्पताल खोले।

जब हम एकता में होते हैं तो हमें सेंस आफ सिक्योरिटी का एहसास होता है। यूनिटी के बिना गांव समाज या देश में रहना मुश्किल हो जाता है।  यूनिटी किसी भी काम को आसान बनाता है। काम करने के दायरा को वितरित करता है। टीमवर्क और बेहतर कोऑर्डिनेशन के साथ में एक ही साथ अनेकों काम किए जा सकते हैं। एकता में रहकर हम अपनी जरूरत की सभी चीजें पूरी कर सकते हैं जो कि अकेले में शायद संभव ना हो। एकता हमारी वैचारिक एकरूपता को दर्शाता है। एकता विभिन्न लोगों के बीच, विभिन्न समाजों के बीच, विभिन्न देशों के बीच हो सकती है। 
जब दो या दो से अधिक लोगों के बीच में यूनिटी होती है तो कार्य क्षमता बढ़ जाती है। आर्थिक रूप से भी हम स्वतंत्र हो जाते हैं।कोई बड़ा ऐसा काम जिसको कि हम शायद अकेले में नहीं कर पाते यूनिटी में होने की वजह से वह काम बहुत कम समय में आसानी से हो जाता है। संगठन की वजह से हम ज्यादा हिम्मती और ऊर्जावान महसूस करते हैं। हमारे सभी समस्याओं का हल चुटकियों में बड़ी आसानी से हो जाता है। किसी बात विशेष को लेकर हमारे मन में इनसिक्योरिटी की जो भावना होती है वह समाप्त हो जाता है।  

भारत एक विभिन्नताओं वाला देश है। हमारे समाज में विभिन्न धार्मिक मान्यताओं  को मानने  लोग रहते हैं। कभी ना कभी किसी बात विशेष को लेकर के झड़प होने की प्रबल संभावना होती हैं।वैसे तो हमारे समाज में ऐसा नहीं होता, लेकिन कभी कभार की छिटपुट घटनाएं शर्मसार कर जाती है।  
अगर विभिन्न धार्मिक मान्यताओं वाले लोगों में यूनिटी का भाव रहेगा तो इस समस्या का पर्मानेंट हल हो जाएगा। सभी के धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा। हम रचनात्मक कार्यों में ध्यान देंगे। देश और समाज का विकास होगा। शांति और सौहार्द का माहौल बना रहेगा। 

एकता के महत्व को पूरा विश्व समझता है। दुनिया में जितने भी बड़ी बड़ी पार्टियां या संगठन है सभी एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं।हम सबकी बुनियादी समस्या भी करीब करीब एक ही जैसा है। कोई देश किसी विशेष समस्या को बेहतरीन तरीके से हल कर लेता है। उसमे उस देश को महारत हासिल हो जाती है। वहीं किसी देश के लिए सिरदर्दी बन जाता है। समस्या के मूल कारण तक पहुंची नहीं पाता। चाहे समस्या शिक्षा के क्षेत्र में हो, ऊर्जा के क्षेत्र में हो ,व्यापार के क्षेत्र में हो, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो, सुरक्षा के क्षेत्र में हो, न्याय के क्षेत्र में हो, चिकित्सा के क्षेत्र में हो या खाद्यान्न के क्षेत्र में हो सकती हैं। इन सभी समस्याओं को हल करने के लिए आपसी सहयोग और संघठन की जरूरत पड़ती है। ये तभी संभव हैं जब देशों के बीच वैचारिक एकरूपता हो । 
 ये संघठन हैं। 
WHO - विश्व स्वास्थ संगठन जो कि विभिन्न देशों के बीच स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर काम करता है।
UNO- संयुक्त राष्ट्र संघ जो कि शांति और सुरक्षा के क्षेत्र में काम करता है।
UNESCO (यूनेस्को) -यह संगठन शैक्षणिक, वैज्ञानिक और कल्चरल क्षेत्र में काम करती है।
विश्व व्यापार संगठन जो कि वैश्विक व्यापारिक क्षेत्र में काम करती है।
ना जाने इसी तरह से विश्व में कितने ही वैश्विक संगठन है जो एकता के सूत्र में बंद कर सर्व कल्याण के लिए काम करती है।

आदिवासी सहयोग समिति इसी तर्ज़ पर काम कर रही है।आप चाहे जिस किसी भी ग्रुप ,संस्था या कम्पनी से जुड़ें हों उनका स्ट्रेंथ बनिए और संरचनात्मक परिवर्तन का हिस्सा बने।

धन्यवाद 

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नोट:- इस लेख के बारे में अपना बहुमूल्य सुझाव अवश्य दें। सरना बिल्ली में हमारे समाज में व्याप्त विसंगतियों के सभी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।नित्य नई Case study के साथ जुडे रहने के लिए Follow करे। बदलाव की शुरुआत पहले कदम से होती है।






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