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एक और एक कितने होते हैं


यूनिटी का इम्पोर्टेंस


बड़ा goal (लक्ष्य) achieve (प्राप्त) करना हो ना , तो उसका मात्र एक ही सिद्धांत होता है।- teamwork और coordination। कोई कहे कि उसे टीम, संस्था, ग्रुप या समूह की आवश्यकता नहीं है। जान जाइए कि वह इंसान आपसे झूठ बोल रहा है या वह अनभिज्ञ है या लक्ष्य बड़ा नहीं है। इंडिविजुअलिटी में अपनी कोई पहचान नहीं होती। 

मान लीजिए कोई आदमी बहुत अच्छा गायक है । लेकिन उसको कोई सुनने वाला ही नहीं तो गायकी किस काम का।बहुत अच्छा खिलाड़ी है लेकिन टीम ही नहीं है।बहुत अच्छा डॉक्टर है लेकिन कोई पेशेंट नहीं। बड़ा बाजार है लेकिन कोई खरीदार नहीं। 


कहने का मतलब है हम सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से , सभी आपस में जुड़े हुए हैं। आप हैं तो मैं हूं। श्रोता है तो गायक है। खेल है तो खिलाडी है। पेशेंट है तो डॉक्टर है। और ना जाने कितने ही।

समूह से शक्ति का विस्तारण 

अगर आपसे कोई पूछे कि 1 और 1 कितना होता है तो आपका क्या जवाब होगा। हम मैथमेटिकली उन्हें बताएंगे कि 1 और 1 दो होता है। क्योंकि हमने यही सीखा है। थियोरेटिकली बिल्कुल सही भी है। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। जिसमें एक और एक दो नहीं , बल्कि एक और एक ग्यारह होते हैं।                 

यह बात संघ, संस्था, ग्रुप या समूह के मामले में बिल्कुल सही है। जब दो विभिन्न विभिन्न वैचारिक दृष्टिकोण वाले व्यक्ति समन्वय के साथ एक उद्देश्य की प्राप्ति के लिए संगठित होते हैं तो वैयक्तिकता समाप्त हो जाती हैं और दो लोगों का ग्रुप या समूह बन जाता है और शक्ति का एक्स्पोनेंशियल विस्तारण होता है। 

जहां तक बात संगठन की मजबूती या शक्ति की है तो वह निर्भर करता है कि कितने गुणी लोगों ग्रुप या समूह का हिस्सा हैं।   

जब दो शारीरिक रूप से बलहीन लोग एक होकर जुड़ेंगे तो उससे उतनी शक्ति उत्पन्न नहीं होगी जितनी की दो शारीरिक रूप से बलिष्ठ लोगों के जुड़ने से बनेगी। 

प्रत्येक बार एक और एक ग्यारह तो बिल्कुल भी नहीं

एक और एक ग्यारह वाली वाक्य में प्रत्येक व्यक्ति की वैल्यू एक है। अगर संगठन में शक्ति संपन्न, धनवान ,   रसूखदार ,सर्वगुण संपन्न , विद्वान लोग होंगे तो उनको तो हम एक कतई नहीं बोल सकते। उनका वैल्यू तो अकेले में दस बीस के बराबर हैं। ऐसी स्थिति में एक और एक 11 नहीं 111 होगा। 1111 होगा या इससे भी कहीं ज्यादा।(लेखन जारी है)










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