योग का अर्थ संस्कृत शब्द " युज् " से लिया गया है, जिसका मतलब होता है " जोड़ना", "एकीकृत करना" या "मिलाना"। इस दृष्टि से योग का मूल अर्थ है — तन, मन और आत्मा का समन्वय, अर्थात् व्यक्ति का स्वयं से, प्रकृति से और परमात्मा से जुड़ना। योग का व्यापक अर्थ: योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक स्तर पर संतुलन लाने की एक संपूर्ण प्रणाली है। इसके प्रमुख तीन आयाम हैं: 1. शारीरिक स्तर पर – शरीर को स्वस्थ, सशक्त और लचीला बनाना; रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाना। 2. मानसिक स्तर पर – मन को शांत, एकाग्र और संतुलित करना; चिंता, तनाव और अस्थिरता से मुक्ति दिलाना। 3. आध्यात्मिक स्तर पर – आत्मा और परमात्मा के मिलन की अनुभूति कराना; आत्म-साक्षात्कार की ओर अग्रसर करना। _______________________________________________ योग के अष्टांग 1.यम ( Moral Discipline ) :- समाज में रहते हुए दूसरों के प्रति हमारा आचरण कैसा होना चाहिए। ये नैतिक नियम हैं, जो हमें एक अच्छा इंसान बनने में मदद करते हैं। 2. नियम ( Personal Discipline ) – खुद के लिए ...
सरना बिल्ली का मतलब ज्ञान के उस दीपक से है जो समाज में फैले अज्ञानता के अँधेरे को ज्योतिर्मय करता है और ज्ञान के प्रकाश को फैलता है I