जंगल में एक शेर है और एक हिरण। हिरण घास खाकर जीवित रहता है और शेर हिरण को खाकर। यह प्रकृति की सामान्य व्यवस्था है। लेकिन एक दिन ऐसा क्षण आता है जब दोनों भगवान से प्रार्थना करते हैं। शेर बहुत मनोभाव से कहता है—हे भगवान, आज मुझे शिकार दे दो, अगर आज शिकार नहीं मिला तो मैं भूखा मर जाऊँगा। उसी समय हिरण भी उतनी ही सच्चाई और डर के साथ भगवान से प्रार्थना करता है—हे भगवान, मेरी जान बचा लो, मुझे शेर से बचा लो। यहीं से मनुष्य के मन में एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता है। भगवान क्या करेगा? क्योंकि भगवान तो दोनों को ही मानने वाला है, दोनों को उसी ने बनाया है। अगर शेर शिकार कर लेता है तो क्या इसका मतलब यह हुआ कि भगवान ने शेर की बात सुन ली और उसकी भक्ति ऊँचे दर्जे की थी? और अगर हिरण मारा गया तो क्या यह मान लिया जाए कि उसकी भक्ति कमजोर थी, इसलिए उसकी जान चली गई? यहीं से विरोधाभास पैदा होता है और यहीं पर सबसे बड़ा भ्रम जन्म लेता है। असल में यह पूरी स्थिति धर्म या भक्ति की परीक्षा नहीं है, यह प्रकृति की व्यवस्था है। भगवान ने ही शेर को शिकारी बनाया और हिरण को शिकार। यह कोई नैतिक अदालत नहीं है जहाँ अ...
How to React – जीवन को समझने की सबसे ज़रूरी कला भूमिका (Introduction) मनुष्य के जीवन में परिस्थितियाँ अपने आप में न तो अच्छी होती हैं, न बुरी। अच्छा या बुरा उन्हें हमारी प्रतिक्रिया बनाती है। अक्सर लोग यह पूछते हैं— “मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?” लेकिन जीवन का सबसे सही प्रश्न यह है— “अब मुझे इस पर कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए?” यही प्रश्न How to React की असली शुरुआत है। घटनाएँ नहीं, प्रतिक्रियाएँ जीवन को दिशा देती हैं हम सभी के जीवन में सफलता और असफलता, सम्मान और अपमान, प्रशंसा और आलोचना— सब कुछ आता है। लेकिन एक ही परिस्थिति में कोई व्यक्ति टूट जाता है कोई व्यक्ति सीख लेता है और कोई व्यक्ति मजबूत बनकर आगे बढ़ जाता है तीनों के साथ घटना एक जैसी होती है, फर्क सिर्फ उनकी प्रतिक्रिया का होता है। प्रतिक्रिया ही हमारे व्यक्तित्व की पहचान है व्यक्ति को उसकी बातें नहीं, उसकी परिस्थितियों में दी गई प्रतिक्रिया पहचान दिलाती है। गुस्से में दी गई प्रतिक्रिया अक्सर पछतावे को जन्म देती है धैर्य से दी गई प्रतिक्रिया समाधान की ओर ले जाती है समझदारी से दी गई प्रतिक्रिया सम्मान...