सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

Bhole

Medical Treatment Record (Hospital Wise) 1. Composite Hospital, SSB Salonibari, Assam 20/12/2022 – Admission (DOA) 22/12/2022 – Discharge (DOD) 2. LGB Regional Institute of Mental Health, Tezpur (General Psychiatry) Revisit / Treatment History 30/08/2022 – Revisit 14/09/2022 – Revisit 29/09/2022 – Revisit 08/11/2022 – Revisit 21/12/2022 – Revisit 24/02/2023 – Revisit 29/05/2023 – Revisit 28/07/2023 – Revisit 29/08/2023 – Revisit 05/09/2023 – Revisit 15/09/2023 – Revisit 26/12/2023 – Visit (General Psychiatry Department) 22/02/2025 – Visit (General Psychiatry) Medicine: Tab Diazepam 27/03/2025 – Follow-up Medicine: Tab Diazepam 3. Mangaldai Civil Hospital, Darrang (Assam) 29/01/2025 – OPD Visit Lab Reports: GGT – 1172 U/L (High) Uric Acid – 9.21 LDH-P – 560 (High) 4. Composite Hospital, SSB Gorakhpur 22/07/2025 – Medical Examination Lab Report: GGT – 39 U/L 5. Diagnostic Reports USG Report (07/03/2023) Mild hepatomegaly with Grade-II Fatty Liver Blood Report (07/03/2023) GGT – 649
हाल की पोस्ट

जब हम अपनी क्षमता से कम पर संतुष्ट हो जाते हैं

प्रस्तावना : औसतपन की खामोश स्वीकृति मीडियोक्रिटी (Mediocrity) केवल औसत प्रदर्शन का नाम नहीं है; यह एक ऐसी मानसिकता है जो हमें हमारी वास्तविक क्षमता से कम पर संतुष्ट रहना सिखा देती है। यह एक अदृश्य समझौता है—अपने ही सपनों के साथ, अपनी ही संभावनाओं के साथ। हम जानते हैं कि हम और बेहतर कर सकते हैं, फिर भी “सब ऐसे ही कर रहे हैं” कहकर स्वयं को समझा लेते हैं। धीरे-धीरे उत्कृष्टता की ओर बढ़ने की बेचैनी शांत होने लगती है। हम सुरक्षित तो रहते हैं, पर विशिष्ट नहीं बन पाते। प्रश्न यह नहीं है कि सामान्य होना गलत है; प्रश्न यह है कि क्या हम अपनी सर्वोत्तम क्षमता तक पहुँचने का ईमानदार प्रयास कर रहे हैं? जब संतोष महत्वाकांक्षा पर भारी पड़ने लगे, तब मीडियोक्रिटी खामोशी से हमारे जीवन में जगह बना लेती है। मीडियोक्रिटी की परिभाषा और अर्थ मीडियोक्रिटी का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति अयोग्य है। इसका वास्तविक अर्थ है—योग्यता का पूर्ण उपयोग न करना। यह वह स्थिति है जब हम अपनी क्षमता को जानते हुए भी उसे पूरी ताकत से जीने का साहस नहीं करते। यह एक मानसिक अवस्था है, जिसमें आत्मसंतोष बढ़ जाता है, जोखिम कम हो जाते हैं औ...

सिविक सेंस

🏛️ Civic Sense : एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान 🌿 प्रस्तावना : सिविक सेंस क्या है? सिविक सेंस केवल नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जागरूक मानसिकता है जो व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी बनाती है। यह वह भावना है जिसमें हम अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझते हैं और उनका पालन करते हैं। आज जब हम विकास, तकनीक और आधुनिकता की बात करते हैं, तब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है – क्या हम सच में एक जिम्मेदार नागरिक हैं? 📖 सिविक सेंस का शाब्दिक एवं वास्तविक अर्थ Civic = नागरिक से संबंधित Sense = समझ या चेतना अर्थात् सिविक सेंस = नागरिक चेतना लेकिन वास्तविक अर्थ इससे कहीं व्यापक है। यह केवल कानून से बचने का तरीका नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता का जीवंत रूप है। 👤 एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान एक जिम्मेदार नागरिक वह है जो: सार्वजनिक स्थान पर कचरा नहीं फेंकता ट्रैफिक नियमों का पालन करता है सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करता है दूसरों के अधिकारों का सम्मान करता है सामाजिक सौहार्द बनाए रखता है वह “मुझे क्या मिलेगा?” के बजाय “सम...

कर्म की प्रतिष्ठा स्थायी होती है,प्रदर्शन की चमक क्षणिक।

🌿 कार्यस्थल का मौन संघर्ष: श्रेय लेने वाले और श्रम से बचने वाले व्यक्तित्व कार्यस्थल केवल काम करने की जगह नहीं होता, वह व्यक्तित्वों की परीक्षा का मैदान भी होता है। हर संस्था — चाहे वह अस्पताल हो, लैब हो, सैन्य इकाई हो या कोई कार्यालय — वहाँ अलग-अलग स्वभाव के लोग मिलते हैं। कुछ लोग शांत रहकर काम करते हैं, तो कुछ लोग काम से ज्यादा अपनी छवि बनाने में ऊर्जा लगाते हैं। 🔎 ऐसा व्यक्तित्व कैसा होता है? ऐसे लोग अक्सर— हर काम का श्रेय स्वयं लेना चाहते हैं “मैं ही सब करता हूँ” जैसी बातें दोहराते हैं जिम्मेदारी से बचने के लिए बहाने ढूंढते हैं अधिकार से अधिक आदेश देने की कोशिश करते हैं अधिकारियों के सामने सक्रिय, लेकिन वास्तविक काम में निष्क्रिय रहते हैं कठिन ड्यूटी या फील्ड कार्य से बचने का रास्ता खोजते हैं अपना काम दूसरों को “डिटेल” करने की प्रवृत्ति रखते हैं लगातार शिकायत करते हैं, पर कार्य प्रबंधन कमजोर रहता है ऐसा व्यवहार टीम की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। लेकिन यह समझना भी जरूरी है  🧠 मनोवैज्ञानिक कारण क्या हो सकते हैं? आत्मविश्वास की कमी – व्यक्ति सोचता है कि यदि वह ...

शेर और हिरण की प्रार्थना: भगवान किसकी सुनता है?

जंगल में एक शेर है और एक हिरण। हिरण घास खाकर जीवित रहता है और शेर हिरण को खाकर। यह प्रकृति की सामान्य व्यवस्था है। लेकिन एक दिन ऐसा क्षण आता है जब दोनों भगवान से प्रार्थना करते हैं। शेर बहुत मनोभाव से कहता है—हे भगवान, आज मुझे शिकार दे दो, अगर आज शिकार नहीं मिला तो मैं भूखा मर जाऊँगा। उसी समय हिरण भी उतनी ही सच्चाई और डर के साथ भगवान से प्रार्थना करता है—हे भगवान, मेरी जान बचा लो, मुझे शेर से बचा लो। यहीं से मनुष्य के मन में एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता है। भगवान क्या करेगा? क्योंकि भगवान तो दोनों को ही मानने वाला है, दोनों को उसी ने बनाया है। अगर शेर शिकार कर लेता है तो क्या इसका मतलब यह हुआ कि भगवान ने शेर की बात सुन ली और उसकी भक्ति ऊँचे दर्जे की थी? और अगर हिरण मारा गया तो क्या यह मान लिया जाए कि उसकी भक्ति कमजोर थी, इसलिए उसकी जान चली गई? यहीं से विरोधाभास पैदा होता है और यहीं पर सबसे बड़ा भ्रम जन्म लेता है। असल में यह पूरी स्थिति धर्म या भक्ति की परीक्षा नहीं है, यह प्रकृति की व्यवस्था है। भगवान ने ही शेर को शिकारी बनाया और हिरण को शिकार। यह कोई नैतिक अदालत नहीं है जहाँ अ...

How to React – जीवन को समझने की सबसे ज़रूरी कला

How to React – जीवन को समझने की सबसे ज़रूरी कला मनुष्य के जीवन में परिस्थितियाँ अपने आप में न तो अच्छी होती हैं, न बुरी। अच्छा या बुरा उन्हें हमारी प्रतिक्रिया बनाती है। अक्सर लोग यह पूछते हैं— “मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?” लेकिन जीवन का सबसे सही प्रश्न यह है— “अब मुझे इस पर कैसी प्रतिक्रिया देनी चाहिए?” यही प्रश्न How to React की असली शुरुआत है। घटनाएँ नहीं, प्रतिक्रियाएँ जीवन को दिशा देती हैं हम सभी के जीवन में सफलता और असफलता, सम्मान और अपमान, प्रशंसा और आलोचना— सब कुछ आता है। लेकिन एक ही परिस्थिति में कोई व्यक्ति टूट जाता है कोई व्यक्ति सीख लेता है और कोई व्यक्ति मजबूत बनकर आगे बढ़ जाता है तीनों के साथ घटना एक जैसी होती है, फर्क सिर्फ उनकी प्रतिक्रिया का होता है। प्रतिक्रिया ही हमारे व्यक्तित्व की पहचान है व्यक्ति को उसकी बातें नहीं, उसकी परिस्थितियों में दी गई प्रतिक्रिया पहचान दिलाती है। गुस्से में दी गई प्रतिक्रिया अक्सर पछतावे को जन्म देती है धैर्य से दी गई प्रतिक्रिया समाधान की ओर ले जाती है समझदारी से दी गई प्रतिक्रिया सम्मान दिलाती है इसलिए कहा जा...

Overweight और Obesity में क्या अंतर है?

Overweight और Obesity में क्या अंतर है? आजकल हम सब किसी न किसी दिन कहते हैं  “यार, वजन बढ़ गया है…” लेकिन सच ये है कि 👉 वजन बढ़ना हर बार बीमारी नहीं होता। कभी ये सिर्फ warning होता है, और कभी problem । यहीं से बात आती है Overweight और Obesity की। Overweight क्या होता है? Overweight का मतलब ये नहीं कि आप बीमार हो गए। इसका मतलब बस इतना है कि 👉 शरीर में जितनी ज़रूरत थी, उससे थोड़ी ज़्यादा चर्बी जमा हो गई है। जैसे – खाना थोड़ा ज़्यादा चलना-फिरना थोड़ा कम और आराम ज़्यादा अभी शरीर कह रहा है: ⚠️ “संभल जाओ, वरना आगे दिक्कत होगी।” तकनीकी भाषा में  जब BMI (Body Mass Index) 25 से 29.9 के बीच होता है,तो उसे Overweight कहते हैं। Obesity क्या होती है? Obesity कोई “थोड़ा मोटा” होना नहीं है। 👉 ये वो stage है जहाँ चर्बी शरीर पर हावी होने लगती है।अब वजन सिर्फ दिखने की चीज़ नहीं रहता, बल्कि: सांस फूलने लगती है घुटनों में दर्द जल्दी थकान बीपी, शुगर की एंट्री तकनीकी तौर पर,जब BMI 30 के पार चला जाए,तो डॉक्टर इसे Obesity कहते हैं।यानी अब मामला serious है। Diet दोनों में क्यों ज़...