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अपनी क्षमता अपने को ही पता नहीं

आपकी आमदनी सिर्फ उसी हद तक बढ़ सकती है जिस हद तक आप बढ़ते हैं ।





जीवन में अक्सर कभी ना कभी हम सभी आर्थिक तंगी के हालात का सामना करते हैं। कई एक बार हमारे पास बहुत सारा धन, आ तो जाता है, मगर गंवा देते है।हमारे पास बेहतरीन अवसर होने के वाउजुद सही उपयोग नहीं कर पाते हैं।

आखिर इसका वजह क्या है ? इसको अपना बदकिस्मती कहें , बुरी अर्थव्यवस्था कहें या फिर गलत पार्टनर । 


चाहे जो मर्ज़ी कह लें। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि धन को लेकर हमारे अंतःकरण में क्या  चल रहा है।  हमारे पास बहुत सारा धन आ भी जाए , मगर  धन को ले कर हमारे पास कोई योजना नहीं हैं। यूं कहें कि हम भीतर से तैयार नहीं है।तो इस बात की पक्की संभावना है कि धन हमारे पास ज्यादा देर तक नहीं टिकने वाली।हम उसे गंवा देंगे।


 इसको हम एक उदाहरण से समझते है। 

जैसे चिकित्सीय कार्य में चिकित्सक और आधुनिक चिकित्सीय उपकरण की जरूरी होती हैं। बेहतरीन उपकरण ज़रूरी हैं, लेकिन उन उपकरणों का कुशलता से प्रयोग कर सकने वाला बेहतरीन चिकित्सक बनना उनसे भी ज्यादा ज़रूरी है। 


हम ज्यादातर लोगों के पास बहुत सारे पैसे बनाने और उसे रखने की आंतरिक क्षमता नहीं होती।सफलता को बनाए रखने और सफलता के मार्ग में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार नहीं होते। जिस वजह से आया हुआ धन को गंवा बैठते हैं।


लॉटरी जीतने वाला ज्यादातर लोग चाहे लॉटरी में जितने भी बडी धनराशि प्राप्त किया हो। उन्हें गंवा बैठे हैं। धन प्रबंधन के अभाव में वे पुनः अपनी पुरानी वित्तीय अवस्था में लौट जाते है । जिस धनराशि में वे पहले आराम से रहते थे। 


ठीक इसके विपरीत अपने दम पर धनवान बनने वाले लोग किसी कारणवश प्राप्त धन खो भी देते हैं। तो वे पुनः कुछ ही समय में खोये हुए धन से  कहीं ज्यादा प्राप्त भी कर लेते हैं।


इसका क्या कारण हैं? धन चाहे चला भी जाए लेकिन धन प्राप्त करने का जो मूल मंत्र है, जिसको कि वे काफी पापड़ बेलने के बाद सीखी, उसको कभी नहीं गंवाते। बल्कि उत्पन्न परिस्थिति से कुछ और भी सीख जाते हैं।चाहे उनकी कंपनी का दिवालिया हो जाए लेकिन वे अपने आप को कभी दिवाला नहीं मानते। जबकि लॉटरी जीतकर धन अर्जित करने वालों के साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता। क्योंकि उन्हें धन के अंदरूनी नियम के बारे में पता नहीं होता।


जो लोग सेल्फमेड धनवान या धन के विज्ञान को समझने वाले होते हैं उनकी नज़र हमेशा लाखों में नहीं करोड़ों अरबों में होती हैं। हम नॉर्मल लोगों की नज़र लाखों या हज़ारों में ही होती हैं। कभी कभी  सैकड़ों या कहें तो ज़ीरो से नीचे चला जाता है। यूं कहें तो आपकी आमदनी सिर्फ उसी हद तक बढ़ सकती है जिस हद तक आप बढ़ते हैं।  सच कहें तो हम कभी अपनी योग्यता या क्षमता का पूरा इस्तेमाल ही नहीं कर पाते।


दुनिया में ज्यादातर लोग सफल ही नहीं हो पाते। लगभग अस्सी प्रतिशत लोग अपनी रोजमर्रा के जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए आर्थिक रूप से स्वतंत्र या आत्मनिर्भर ही नहीं बन पाते। हम सबकी यही स्थिति हैं।


हम में से अधिकांश लोग छोटी छोटी मगर मोटी बातों से हमेशा अनभिज्ञ रहते हैं। जीवन की गाड़ी की स्टेरिंग अपने हाथ में होती तो है लेकिन हम सब झपकियां ले रहे होते हैं। दिखने वाली ऊपर की चीजों पर हमारा ध्यान तो जाता है मगर अंदर के चीजों के बारे में कभी हमारा ध्यान तक नहीं जाता।

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