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हर गुणी आदमी में यह गुण होना ही चाहिए।

स्थिति-1
खाते समय मुंह से चबाने की निकलती आवाज

खाते समय मुंह से आवाज का आना न केवल हमारी व्यक्तिगत शिष्टाचार को धूमिल करती है, बल्कि यह दूसरों के लिए असुविधा का भी कारण बनती है। 
 एक तस्वीर है जिसमें एक आदमी खाना खा रहा है और उसके मुंह से आवाज आ रही है, जबकि सामने बैठा व्यक्ति गुस्से से उसे देख रहा है।

लेकिन सच्चाई यह भी है कि कई बार व्यक्ति को अपनी इस आदत का अहसास तक नहीं होता। खाते समय मुंह से आवाज आना अक्सर अचेतन रूप से होता है, और व्यक्ति इस पर ध्यान नहीं देता। हम में से अधिकतर लोग इसे इसीलिए भी नहीं जान पाते क्योंकि यह आदत धीरे-धीरे विकसित हुई होती है और इसे हम सामान्य मान लेते हैं। और ना कभी हमें किसी ने इसके बारे में कभी ठोका हो। 

इस तरह की आदतें न केवल हमारी व्यक्तिगत छवि को प्रभावित करती हैं, बल्कि यह हमारे आस-पास के लोगों के लिए परेशानी का भी कारण बनती हैं। कई एक बार यह हमारे लिए शर्मिंदगी का कारण बनती है। 

आखिर खाते समय मुंह से आवाज क्यों आती है 

जब हम खाना खाते हैं, तो चबाने के दौरान लार और खाने का मिश्रण होता है, जिससे आवाज उत्पन्न होती है। यह सामान्य है, खासकर अगर खाना बहुत चिपचिपा या तरल है।
कुछ लोग जल्दी या जोर से चबाते हैं, जिससे अधिक आवाज निकलती है।
कुछ खाने का बनावट ही ऐसा होता है कि स्वाभाविक रूप से अधिक आवाज निकलती हैं। जैसे कि कुरमुरा, चटपटी, क्रंची और चिपचिपी चीजें।

खाने के दौरान मुंह से निकलने वाली आवाज को बिल्कुल कम किया जा सकता है।

खाने के दौरान मुंह बंद रखने से आवाज काफी हद तक कम हो जाती है। मुंह खुला रखने से चबाने की आवाज बाहर आती है, जिससे लोग असहज हो सकते हैं।
धीरे और सावधानी से खाने से न केवल पाचन बेहतर होता है, बल्कि चबाने की आवाज भी कम होती है।
छोटे निवाला लेने से चबाने में आसानी और आवाज भी कम होती है। 
खाते समय नाक से सांस लें और मुंह से सांस लेने से बचें। इससे आवाज कम होती है।
कुरमुरा या चिपचिपी खाने को खाते समय विशेष सावधानी वरतें और धीरे से चबायें। 

चलिए मैं आप लोगों के साथ में एक दो इंसिडेंट शेयर करता हूं। 
अमूमन, मैं अपने परिवार के साथ रात्रि का भोजन रात 8:30 बजे तक कर लेते हैं। एक दिन की बात है, मुझे भूख नहीं था तो मैं रात्रि का भोजन करने से मना कर दिया। रात्रि का 11:30  का समय रहा होगा, मुझे तेज भूख लगने लगी। मुझसे रहा नहीं गया, तो मैं किचन में जाकर खाना निकाल कर बेड में ही बैठे कर खाने लगा। मेरी पत्नी गहरी नींद में सोने ही वाले थी कि मेरी खाने की आवाज सुनकर उठ गई और लिटरली उसने मुझसे कहा क्या जी आप सूअर के जैसा मुंह बजा बजा कर खाते हैं। मुझे तो इसका एहसास भी नहीं था की मुंह से निकलने वाली आवाज इतना इरिटेटिंग होता है। लेकिन अब मैं इन सब बातों को लेकर काफी कॉन्शियस हो गया हूं। 

एक बार मैं दोस्तों के साथ रेस्टोरेंट में डिनर कर रहा था। सबकुछ मजेदार था, लेकिन एक दोस्त तेजी से खाने लगा और उसके मुंह से जोर-जोर की चबाने की आवाज आने लगी। शुरुआत में हमने अनदेखा किया, लेकिन उसकी आवाज इतनी तेज़ हो गई कि आसपास बैठे लोग भी देखने लगे। मैंने उसे धीरे से इशारा किया कि आवाज कम करने की कोशिश करे। उसने हंसते हुए माना और  शर्मिंदगी महसूस करते हुए धीरे-धीरे खाने लगा। 

स्थिति-2
मुंह से बदबू का आना

मुंह से बदबू आना निश्चित रूप से एक बहुत ही शर्मिंदगी भरा या लज्जा जनक स्थिति हो सकती है, खासकर जब आप किसी सामाजिक, व्यावसायिक, दोस्त यार के साथ मस्ती के वातावरण में होते हैं। यह समस्या व्यक्ति को आत्म-संकोच का शिकार बना सकती है और दूसरों के साथ बातचीत में असहजता पैदा कर सकती है। किसी के करीब आकर बात करना या सार्वजनिक रूप से बोलना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि लोग इस बदबू को नोटिस कर सकते हैं और आपसे दूरी बनाने की कोशिश करते हैं। और आपको पता भी नहीं चलता। जिससे व्यक्ति की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। मुंह की बदबू कई बार अच्छे रिश्तों और बातचीत को प्रभावित करती है, और लोग बिना बताए इस स्थिति से दूर रह सकते हैं। 
यहां एक तस्वीर है जिसमें दो आदमी आपस में बात कर रहे हैं, लेकिन उनमें से एक के मुंह से बदबू आ रही है, और दूसरा व्यक्ति असहज प्रतिक्रिया दे रहा है। आप इसे देख सकते हैं।

मुंह से क्यों बदबू आती है और इसे कैसे दूर करें और आप यह कैसे पता करेंगे कि सामने वाला व्यक्ति आपसे बात करने में असहज महसूस कर रहा है । 

मुंह से बदबू कई कारणों से आ सकती है, जैसे कि खराब मौखिक स्वच्छता, दांतों में फंसा भोजन, सूखा मुंह, तंबाकू या कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन जैसे कि गुटखा, शराब जर्दा पान। इसके अलावा, पेट की समस्याएं या संक्रमण भी मुंह की दुर्गंध का कारण बन सकते हैं। जब मुंह में बैक्टीरिया बढ़ते हैं, तो वे सल्फर यौगिक उत्पन्न करते हैं, जिससे बदबू होती है।

इससे बचने के लिए नियमित रूप से दांत साफ करना, दिन में दो बार ब्रश करना और फ्लॉस करना जरूरी है। साथ ही, जीभ को साफ रखना और खूब पानी पीना भी फायदेमंद होता है, जिससे मुंह में सूखापन न हो। यदि समस्या बनी रहती है, तो दंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। माउथवॉश या माउथ फ्रेशनर का भी उपयोग किया जा सकता है। 

यह एक ऐसी प्रॉब्लम है जो खुद को पता नहीं लगता लेकिन सामने वाले की प्रतिक्रिया को देखकर हमें समझ लेना चाहिए। आप यह जान सकते हैं कि सामने वाला व्यक्ति असहज है, यदि वह बातचीत के दौरान बार-बार पीछे हटने की कोशिश करता है, मुंह ढंकने की प्रवृत्ति दिखाता है, या आंखों में सीधा संपर्क नहीं बना रहा। उसके हावभाव और शरीर की भाषा पर ध्यान दें, जो संकेत दे सकती है कि वह असहज महसूस कर रहा है। अगर आप खुद पर ध्यान देंगे, तो आप दूसरों की प्रतिक्रिया आसानी से समझ पाएंगे। 

मुंह से होने वाले बदबू के कारण उत्पन्न हुई एक लज्जा जनक स्थिति

राहुल अपने ऑफिस के एक महत्वपूर्ण मीटिंग में शामिल हुआ था। मीटिंग में कंपनी के नए क्लाइंट्स भी मौजूद थे, और सभी लोग गंभीर चर्चा में व्यस्त थे। जब राहुल ने अपनी बात रखनी शुरू की, तभी बगल में बैठे एक सहकर्मी ने थोड़ा पीछे हटकर अपने चेहरे पर हल्की असहजता दिखाई। राहुल को लगा कि शायद कुछ गलत कह दिया हो, लेकिन जल्द ही उसने महसूस किया कि कई लोग उसकी ओर देखकर हल्के-हल्के अपने नाक पर हाथ रख रहे थे।
राहुल को अचानक समझ आया कि समस्या उसकी बातों में नहीं, बल्कि उसके मुंह से आ रही बदबू में थी। वह बेहद शर्मिंदा महसूस करने लगा, और अचानक से उसका आत्मविश्वास गिर गया। वह जल्दी से अपनी बात खत्म करके बैठ गया, और मन ही मन सोचने लगा कि अगली बार ऑफिस आने से पहले उसे इस समस्या का ध्यान रखना होगा।
यह एक आम स्थिति है, जिसमें मुंह की बदबू न सिर्फ खुद को बल्कि दूसरों को भी असहज कर सकती है, और इससे लज्जाजनक स्थिति उत्पन्न हो सकती है।


स्थिति - 3
पसीने की बदबू

पसीने की बदबू से होने वाली समस्या कई बार असहज और लज्जाजनक स्थिति उत्पन्न करती हैं। पसीना प्राकृतिक रूप से शरीर की ठंडक बनाए रखने और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का एक तरीका है, लेकिन जब यह दुर्गंध पैदा करता है, तो यह  हमारे पर्सनल हाइजीन पर सवालिया निशान लगता है। पसीने में मौजूद बैक्टीरिया जब त्वचा पर आते हैं, तो यह बदबू पैदा करते हैं।
यहां दो दोस्त आपस में बात कर रहे हैं, जिसमें से एक पसीने की बदबू से परेशान हो रहा 

सार्वजनिक जगहों पर या किसी सामाजिक समारोह में, कार्य कार्य स्थल में, यदि किसी के पसीने की बदबू तेज़ हो, तो उसके आसपास के लोग असहज महसूस करते हैं। लोग दूरी बनाना शुरू कर देते हैं या नाक ढकने जैसी क्रियाओं से अपनी असहजता व्यक्त करते हैं, जिससे व्यक्ति को शर्मिंदगी हो सकती है। ऑफिस, सार्वजनिक परिवहन, या मित्रों के साथ समय बिताने के दौरान यह समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है, खासकर जब लोग सीधे कुछ न कहें, लेकिन हाव-भाव से असहजता जाहिर करें।

इससे बचने के लिए नियमित स्नान, साफ कपड़े पहनना, और डिओडरेंट या एंटीपर्सपिरेंट का उपयोग करना जरूरी है। इसके अलावा, अत्यधिक पसीना आने पर डॉक्टर की सलाह लेना भी मददगार साबित हो सकता है।
स्थिति 4
खाने के बाद थल में ही हाथ धोना कितना हाइजीनिक है

अक्सर देखा जाता है कि भोजन के बाद लोग, खासकर ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों में, थाली में ही हाथ धोते हैं, भले ही पास में धोने की उचित जगह उपलब्ध हो। यह प्रथा एक लंबे समय से चली आ रही आदत है, जो शायद सुविधा और समय बचाने के कारण विकसित हुई है। हालांकि आधुनिक समय में यह स्वच्छता के मानकों पर खरी नहीं उतरती । देखने में काफी अनहाइजीनिक लगता है। 
 यह एक व्यक्ति है जो खाना खाने के बाद खाई हुई थाली में ही बिना उठे हाथ धो रहा है

इसके पीछे एक कारण यह हो सकता है कि लोग भोजन के बाद थाली को ही एक साधन मानते हैं, जिससे कम पानी और कम मेहनत में सफाई की जा सके। उन्हें लगता है कि थाली में हाथ धोने से एक ही बार में थाली और हाथ दोनों साफ हो जाएंगे, जिससे सफाई में आसानी होती है। वहीं, कुछ मामलों में यह आदत परिवार में बड़े-बुजुर्गों से सीखी जाती है और स्वाभाविक रूप से अपनाई जाती है।

लेकिन जब कभी हम ऐसे परिवेश में बाहर जाते हैं जहां इस तरह की परंपरा नहीं रही है ,तो आदतन हम वहां भी हाथ साफ खाने की थाली में ही कर देते हैं जो कि  नोटिस की जाने वाली कृत्य है जो हमारे लिए बाद में शर्मिंदा का विषय बनता है जब कोई हमें टोकता है इस संबंध में। 

स्थिति-5
जांभाई लेना कुछ स्थितियों में एम्बैरसिंग हो सकता है
Yawning (जांभाई) एक सामान्य शारीरिक क्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपने मुंह को चौड़ा खोलता है और गहरी सांस लेता है, फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ता है। यह अक्सर थकान, नींद, ऊब, या तनाव का संकेत होती है। 
यह  पिक्चर, जिसमें एक व्यक्ति औपचारिक माहौल में जांभाई लेते हुए थोड़ा एंबैरेस्ड दिख रहा है।

कुछ परिस्थितियों ऐसी होती हैं जहां हमें जांभाई लेने से बचनी चाहिए। यह हमारे लिए एम्बैरसिंग करने वाला मूवमेंट हो सकता है, खासकर जब आप महत्वपूर्ण सामाजिक या पेशेवर माहौल में होते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप किसी महत्वपूर्ण मीटिंग, सार्वजनिक भाषण, इंटरव्यू  या कोई विशेष डील कर रहे हो , तो जांभाई लेना ऐसा संदेश दे सकता है कि आप ऊब रहे हैं या ध्यान नहीं दे रहे हैं या आप अनप्रोफेशनल हो। 
सामाजिक समारोहों में, जैसे शादी या पार्टी, जांभाई लेना असभ्य या असम्मानजनक माना जा सकता है, खासकर अगर लोग इसे देख लें। जब आप किसी से सीधी बातचीत कर रहे हों और बीच में जांभाई ले लें, तो यह असहमति या आलस्य का संकेत माना जा सकता है।
निवारण
जांभाई आने पर विनम्रता से मुंह ढकें, ध्यान भटकने से बचें, और महत्वपूर्ण क्षणों में गहरी सांस लेकर खुद को सतर्क रखें।





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