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PET SCAN


दोस्तों, जिस तरह हमने टेलीकम्युनिकेशन में 2G से लेकर 5G तक का इवोल्यूशन देखा —
जहाँ कुछ सेकंड में पूरी दुनिया जुड़ जाती है,
उसी तरह, अब मेडिकल डायग्नोस्टिक्स की दुनिया में भी, एक जबरदस्त क्रांति आ चुकी है!
और इसी क्रांतिकारी सफ़र की अगली कड़ी है  PET Scan जो एक ऐसी आधुनिक तकनीक जो कैंसर की पहचान और इलाज दोनों में गेम-चेंजर बन चुकी है।

किसी खेत में जब फसल उगाई जाती है, तो किसान बहुत ध्यान रखता है मिट्टी की नमी, खाद की मात्रा और पौधों की सेहत पर।
लेकिन कभी-कभी उसी खेत में खरपतवार (weeds) भी उग आते हैं।ये खरपतवार दिखने में फसल जैसे ही लगते हैं,मगर इनकी चाल अलग होती है —
ये ज़्यादा तेज़ी से बढ़ते हैं ,और बहुत ज़्यादा मात्रा में पानी, धूप, खाद और पोषक तत्वों को सोख कर  खेत के एक हिस्से से लेकर धीरे-धीरे पूरे खेत में फैल जाते है और असली फसल की बढ़त को रोक देता है। 
यही कुछ शरीर के अंदर कैंसर कोशिकाएँ (Cancer Cells) करती हैं। शुरुआत में तो ये एक छोटे से हिस्से में होती हैं,
लेकिन फिर बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं।ये कोशिकाएँ सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कई गुना ज़्यादा “ऊर्जा” यानी ग्लूकोज़ खाती हैं, 

डॉक्टर  कोशिकाओं के इसी ‘भुक्खड़ स्वभाव’ का फायदा उठाते हैं उसको पकड़ने में। 
इसमें मरीज को radioactive chemical जिसे Fluoro-Deoxy-Glucose कहते हैं। इसको radiotracer भी कहते है को inject की जाती है। 
यह असल में ग्लूकोज़ (शुगर) का रूप है, यह शरीर में जाकर सामान्य ग्लूकोज़ की तरह ही काम करता है,
लेकिन जहाँ कोशिकाएँ ज़्यादा सक्रिय होती हैं —
जैसे कैंसर कोशिकाएँ, जो बहुत “भुक्खड़” होती हैं —
वहाँ यह radiotracer ज़्यादा मात्रा में जमा हो जाता है।

इसके बाद यह पॉज़िट्रॉन (positrons) छोड़ता है,
जो शरीर के इलेक्ट्रॉनों से टकराकर गामा किरणें (gamma rays) बनाते हैं। PET स्कैनर की detectors  इन्हीं किरणों को पकड़कर 3D color इमेज बनाता है।

इन तस्वीरों में जहाँ ज़्यादा चमक दिखती है,
वहाँ कोशिकाएँ ज़्यादा ग्लूकोज़ खा रही होती हैं —
यानी वहाँ बीमारी (जैसे कैंसर) ज़्यादा सक्रिय है।


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