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SIR

Special Intensive Revision (SIR):- वोटर लिस्ट को अपडेट करने की ऐसी संवैधानिक प्रक्रिया होता है, जिसे चुनाव आयोग तब चलाता है जब किसी क्षेत्र की मतदाता सूची को जल्दी और पूरी तरह अपडेट करना जरूरी हो। इसमें बहुत तेज़ी से—नियत समय के भीतर—पूरी मतदाता सूची की जाँच, सुधार और नए नाम जोड़ने का काम किया जाता है।

इसको इस उदाहरण के साथ समझिए
मान लीजिए जिला – गुमला में वोटर लिस्ट बहुत पुरानी है।
कई नए युवा 18 साल के हो गए हैं,कुछ लोग गाँव छोड़कर चले गए हैं,और कुछ लोगों की मृत्यु हो चुकी है,लेकिन इन बदलावों का अपडेट वोटर लिस्ट में नहीं हुआ है।अब अचानक वहाँ लोकसभा चुनाव घोषित हो जाता है।चुनाव आयोग चाहता है कि एकदम सही और अपडेटेड वोटर लिस्ट तैयार हो।
इसलिए आयोग आदेश देता है:“गुमला जिले में Special Intensive REVISION (SIR) चलाया जाए।”

BLO हर घर में जाकर पूछता है:
✔ कौन 18 वर्ष का हो गया?
✔ कौन बाहर नौकरी पर चला गया?
✔ कोई मृत्यु हुई है?
✔ किसी का नाम गलत है?

नए मतदाता → Form-6 भरे जाते हैं ।
मृत/शिफ्टेड लोग → Form-7 भरे जाते हैं।
नाम/पता/उम्र सुधार → Form-8 भरे जाते हैं।

डुप्लीकेट नाम हटाए जाते हैं,गलतियाँ सुधारी जाती हैं
नई एंट्री को पुष्टि कर अंतिम सूची बनाई जाती है

अब गुमला जिले की वोटर लिस्ट:
✔ पूरी तरह अपडेट
✔ बिना गलती
✔ सभी नए मतदाता शामिल
✔ मृत/डुप्लीकेट हटे हुए
✔ चुनाव के लिए 100% तैयार

 इसका उद्देश्य
✓नई उम्र वाले मतदाताओं को सूची में जोड़ना (18 वर्ष या ऊपर)
✓गलतियाँ सुधारना – नाम, पता, उम्र आदि
✓डुप्लीकेट वोट हटाना
✓किसी भी मृत या स्थानांतरित मतदाता का नाम हटाना
✓ लंबे समय से अपडेट नहीं हुई सूचियों को सही करना
कैसे किया जाता है?
यह प्रक्रिया कैसे की जाती है
✔ घर-घर सर्वे (Door-to-Door Verification)
✔ स्कूल/कॉलेज से नए 18+ युवाओं की सूची लेना
✔ BLO द्वारा विशेष कैंप
✔ बूथ स्तर पर आवेदन सुधार और सत्यापन
✔ फॉर्म–6 (New), फॉर्म–7 (Delete), फॉर्म–8 (Correction) 

SIR से जुड़ी कुछ विवाद जो सुर्खियों में रही 

 सही मतदाताओं के नाम गलती से या अत्यधिक संख्या में हट जाने का आरोप
★ नए 18+ युवा मतदाताओं के नाम सूची में शामिल न होने की शिकायत
★ राजनीतिक दलों द्वारा यह आरोप कि वोटर लिस्ट सुधार किसी एक पार्टी को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया
★ BLO द्वारा घर-घर सर्वे ठीक से न करने और गलत विवरण दर्ज करने की समस्या
★ Form-6, Form-7, Form-8 जमा होने के बावजूद उनका डिजिटल अपडेट न होना
★ मृत/स्थानांतरित व्यक्तियों के नाम हटाने में लापरवाही
★ कैंप (कैम्पों) की तारीख, स्थान और समय की जानकारी मतदाताओं को सही तरह से न मिलना
★ वोटर सूची में डुप्लीकेट नाम रह जाना या गलत तरीके से हट जाना
★ डेटा एंट्री के दौरान उम्र, नाम, पता या फोटो में त्रुटियाँ आ जाना
★ कुछ क्षेत्रों में तेज़ी से काम होना और कुछ में बेहद धीमा—जिससे भेदभाव का आरोप लगना

SIR से जुड़ी कुछ गलतफहमियां 
★ लोगों को लगता है कि SIR केवल चुनाव आने पर ही किया जाता है, जबकि यह सामान्य समय पर भी किया जा सकता है।
★ कई लोग मानते हैं कि SIR में “जानबूझकर” नाम हटाए जाते हैं, जबकि अधिकतर मामलों में यह डेटा-एंट्री या सत्यापन की गलती होती है।
★ कुछ लोगों की गलतफहमी है कि Form-6, 7, 8 भरने पर नाम तुरंत जुड़ या हट जाता है — जबकि इसमें सत्यापन की कानूनी प्रक्रिया होती है।
★ कई मतदाता सोचते हैं कि BLO बिना घर आए नाम हटा देता है, जबकि ऐसा तभी होता है जब घर पर कोई मौजूद न हो और जानकारी अपूर्ण मिले।
★ कुछ लोगों को लगता है कि कैंप में नहीं गए तो उनका नाम अपने-आप कट जाएगा — जबकि सुधार/हटाने के लिए औपचारिक फॉर्म जरूरी है।
★ बहुत लोग मानते हैं कि मतदाता सूची एक बार ठीक हो जाए तो फिर कभी बदलती नहीं — जबकि यह लगातार अपडेट होती रहती है।
★ कुछ लोग समझते हैं कि एक ही व्यक्ति दो जगह वोट देने के लिए नाम जान-बूझकर रखा जाता है, जबकि अक्सर यह एड्रेस-शिफ्ट की सूचना न देने से होता है।
★ कई लोग सोचते हैं कि जिनका नाम एक बार कट गया, वो दोबारा नहीं जुड़ सकता — जबकि Form-6 से किसी भी समय नाम फिर से जुड़ सकता है।
★ लोगों को लगता है कि SIR में राजनीतिक दल सीधे हस्तक्षेप करते हैं — जबकि प्रक्रिया पूरी तरह प्रशासनिक और कानूनी होती है।
★ कई लोगों की गलतफहमी है कि वोटर ID कार्ड नहीं है तो नाम लिस्ट में नहीं होगा — जबकि दोनों अलग चीजें हैं; नाम लिस्ट में होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है







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