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Right to Disconnect

Right to Disconnect — आसान भाषा में


आज के समय में हमारे मोबाइल और लैपटॉप नेवो काम और निजी जिंदगी के बीच की लाइन लगभग मिटा दी है। ऑफिस का टाइम खत्म हो भी जाए, तब भी ईमेल, कॉल या व्हाट्सऐप मैसेज आते रहते हैं।
इसी समस्या को समझते हुए दुनिया के कई देशों ने एक नया अधिकार बनाया—Right to Disconnect

इसका मतलब बहुत सीधा है:

ड्यूटी खत्म होने के बाद आपको काम से जुड़े कॉल या मैसेज का जवाब देने की कोई मजबूरी नहीं है—और अगर आप जवाब न दें तो कोई सज़ा भी नहीं मिल सकती।

यह अधिकार कर्मचारियों को अपने परिवार, आराम और निजी समय के लिए स्पेस देता है।
कई कंपनियाँ तो अब डिजिटल वेलनेस ट्रेनिंग और “नो आफ्टर ऑवर्स कॉल” जैसी नीतियाँ भी बना रही हैं, ताकि कर्मचारियों का तनाव कम हो और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहे।


दुनिया में इसे कैसे अपनाया गया?

फ्रांस

फ्रांस इस अधिकार को कानूनी रूप देने वाला पहला देश था। वहाँ कंपनियों को यह तय करना पड़ता है कि कर्मचारियों से ऑफिस टाइम के बाद कैसे और कब संपर्क किया जाएगा।
मतलब—काम तो होगा, लेकिन स्वस्थ तरीके से।

ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया ने 2024 में कानून बनाया जिसमें कर्मचारी साफ़ तौर पर आफ्टर-ऑवर्स मैसेज या कॉल को मना कर सकते हैं।
अगर किसी तरह का विवाद हो, तो Fair Work Commission बीच में आता है।

अन्य देश

स्लोवाकिया, बेल्जियम, फिलीपींस जैसे देशों में भी यह अधिकार अलग-अलग तरीकों से लागू है।
दुनिया भर में लोग यह समझ रहे हैं कि आराम और प्राइवेसी भी उतने ही जरूरी हैं जितना काम।


भारत में क्या स्थिति है?

अभी तक पूरे भारत के लिए कोई केंद्रीय कानून नहीं है, लेकिन बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।

केरल का 2025 बिल

केरल ने एक अहम कदम उठाते हुए निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ऐसा बिल पेश किया है, जिसमें:

  • ऑफिस टाइम के बाद ईमेल, कॉल या वीडियो मैसेज का जवाब देना अनिवार्य नहीं
  • जवाब न देने पर किसी तरह का दंड या पदावनति नहीं
  • कंपनियों को स्पष्ट नीति बनानी होगी

यह एक तरह से कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और सम्मानित निजी समय की सुरक्षा है।

राष्ट्रीय Right to Disconnect Bill (प्रस्तावित) – 2025

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि:

  • छुट्टी और आफ्टर-ऑवर्स में काम का मैसेज न कहना एक अधिकार होगा
  • नियम तोड़ने पर कंपनी पर जुर्माना
  • एमरजेंसी के लिए अलग सहमति-आधारित व्यवस्था
  • अनुपालन की निगरानी जिला स्तर की समितियाँ करेंगी

यह दिखाता है कि भारत भी धीरे-धीरे एक स्वस्थ वर्क कल्चर की ओर बढ़ रहा है।


अंत में…

Right to Disconnect का असली मकसद बहुत सरल है—
काम जरूरी है, लेकिन जिंदगी उससे भी ज्यादा जरूरी है।

जब कर्मचारी आराम करते हैं, खुश रहते हैं और अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं, तो वे अगले दिन और बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं।
यही संतुलन इस अधिकार का मूल है।



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