सामाजिक नशाखोरी(II)

लत क्या है और इसकी पहचान क्या है?

सामाजिक नशाखोरी के अध्याय एक में हमने नशाखोरी के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करी और साथ ये भी जाना कि नशाखोरी की शुरुवात कैसे होती है। दूसरे अध्याय में लत क्या होती है और लत की पहचान कैसे करें इसके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। लत के तो अनेकों रूप है । लेकिन यहां नशा के कारण उत्पन्न लत की बातें करेंगे।




नशीली पदार्थों के लगातार उपयोग के कारण हमारे मस्तिष्क के न्यूरोलॉजिकल पैटर्न में ऐसे बदलाव , जो नशीली पदार्थों के उपयोग पर हमारा नियंत्रण समाप्त कर देता है। ऐसी बात भी नहीं, कि नशा, बहुआयामी बर्बादी का कारण बनता है उसकी जानकारी हमें नहीं है। इसका दुष्परिणाम हमारे शरीर में दिखने भी लगता। इसके अलावा हमारे पारिवारिक रिश्ते, आर्थिक स्थिति और कामकाज में भी असर पड़ने लगता है।
साफ शब्दों में कहें तो नशा पर अपना सेल्फ कंट्रोल खत्म हो जाता हैं। नशाखोरी के दलदल में दिन-प्रतिदिन हमारा पैर धसते चला जाता हैं। सब कुछ पता होने के बावजूद हम असहाय और लाचार महसूस करते हैं। ऐसी अवस्था को ही लत/व्यसन कहा जाता है। लत एक्चुअली और कुछ नहीं, हमारे द्वारा नशाखोरी जैसे गलत आदतों के लगातार इस्तेमाल किए जाने के फलस्वरूप उत्पन्न परिणाम है। 

हम कैसे जाने कि हमें नशाखोरी की लत लग चुकी है।    

  • नशा करने वाले का सबसे पहला पहचान यह है कि वह हमेशा डिनाइल मोड में रहेगा। वह कभी स्वीकार नहीं करेगा कि मुझे नशीली पदार्थों को लेने का लत लग चुकी है। 
  • नशीली पदार्थों को क्यों लेना चाहिए के पक्ष में बेतुका तर्क प्रस्तुत करके हमेशा जस्टिफाई करने की कोशिश में रहेगा।
  • नशीली पदार्थों को लेने की प्रबल इच्छा या तलब होगी। सेवन कैसे की जाए और उसकी कैसे व्यवस्था की जाए मन में हमेशा यही चलता रहता है। इसको लेने के लिए जो कुछ भी संभव तरीका हो सकता है करने की कोशिश करते हैं।
  • दिन प्रतिदिन नशीली पदार्थों को लेने की मात्रा में बढ़ोतरी होती जाती है। पहले एक पेग ही काफी था लेकिन अब तो गिनती ही नहीं।
  • शरीर में अजब सी बेचैनी महसूस होती है जिसको कि हम समझा नहीं सकते।
  • शरीर कांपने लगता है। जब तक हम शराब की एक निश्चित मात्रा नहीं ले लेते तब तक शरीर का कांपना कम नहीं होता है। लेने के बाद सब कुछ ठीक हो जाता है। समझने में हम यही गलती कर लेते हैं। और इसको अपना इलाज समझ बैठते हैं।
  • शरीर में हमेशा पानी कमी(Dehydration) की फीलिंग महसूस होती रहती है।  पीने के बाद भी नहीं जाती। अगर देखा जाए तो शराब, अल्कोहल का ही एक रूप है। मेडिकली अगर देखा जाए तो अल्कोहल बहुत बड़ा डिहाइड्रेंट होता है । डिहाइड्रेंट उस पदार्थ को कहते हैं जो किसी चीज में मौजूद पानी की मात्रा को बाहर निकालने का काम करता है। 
  •  रक्तचाप हमेशा अनियमित रहने की शिकायत होती है।
  • किसी भी काम को हम बिना नशीली पदार्थों को लिए पूरे एकाग्रता के साथ काम नहीं कर पाते हैं। काम में मन नहीं लगता।
  • हमारे अधिकतर समय नशीली पदार्थों के तलाश में ही बीत जाती है।
  • दोस्ती भी अपने जैसे लोगों से ही होती है।
  • शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभावो के बावजूद सेवन बंद नहीं कर पाते हैं।
  • हमेशा ये शिकायत होती है कि आंख के सामने कीड़े मकोड़े चल रहें हैं और कानों में अजीबों गरीब आवाजें सुनाई देती हैं।
  • नींद कभी पूरा नहीं होती।
  • खाना खाने के बाद हमेशा नशीली चीजों को लेने की तलब होती हैं।
  • सुबह में बिना नशीले पदार्थों को लिये शौच भी नहीं होती।
  • गाड़ी चलाते समय भी नशीली पदार्थों को लेने की बड़ी तलब होती है। 
  • मेडिकली अगर देखा जाए तो यकृत शराब के कारण ज्यादा प्रभावित होता है। लत वाले आदमी की ब्लड टेस्ट में हमेशा यकृत  एंजाइम जैसे कि SGOT,SGPT,ALP, और GGT अक्सर बढ़ा हुआ ही रहता है।    
  • अगर हमें इस तरह का लक्षण दिखना शुरू हो जाए तो हमें सावधान हो जाने की जरूरत है।


(नशाखोरी के तीसरे अध्याय में दुष्प्रभाव के बारे में चर्चा करेंगे)

पहला अध्याय :- नशााखोरी क्या है और इसकी शुरुवात कैसे होती हैं ?


Most Popular articles (लोकप्रिय लेख) 









टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
अगला भाग कब अये गा
VINOD ORAON ने कहा…
धन्यवाद आपको
थर्ड पार्ट बहुत जल्द पब्लिश करी जाएगी

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आदिवासियों से दुनियां क्या सीख सकती है।

सामाजिक नशाखोरी(I)

ट्रस्ट का bylaws कैसे बनायें