अंधविश्वास।

 अंधविश्वास क्या है। 













ऐसे तर्कहीन धारणाएं, मान्यताएं या विश्वास , जिसका कोई  युक्ति संगत वैज्ञानिक आधार नहीं होता है। घटनाओं का कारण हमेशा पीछे छिपी, अदृश्य अलौकिक शक्तियों का ,हाथ होने की मनगढ़ंत, आधारहीन व्याख्या की जाती है ।  कारणों को लेकर हमेशा गलत अवधारणाएं होती हैं । अदृश्य , अलौकिक शक्तियों का अंजाना डर बना रहता है। और यह डर ,जीवन भर रहता है।  जब तक ज्ञान रूपी प्रकाश से अज्ञानता रूपी पर्दा हट नहीं जाता। 
हमारे जीवन में बहुत से ऐसी घटनाएं होती है ,जिन घटनाओं के कारणों के बारे  में हमें पता नहीं होता ,और उन कारणों के पीछे अज्ञानतावस हम अदृश्य शक्ति का होना मान लेते हैं। यह मन मस्तिष्क में ऐसे बैठ जाती है जो कभी जाते हीं नहीं। 

अंधविश्वास इतना प्रचलित क्यों है। 

विज्ञान का काम करने का एक तरीका होता है ।किसी भी घटनाओं को वैज्ञानिक कसौटी या सिद्धांतों से सिद्ध करने के लिए अनेक प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है। सबसे पहले घटनाओं को बहुत ही बारीकी से अवलोकन किया जाता है। घटना की प्रकृति को समझने की कोशिश की जाती है।  घटनाओं से रिलेटेड सभी जरूरी जानकारी इकट्ठा की जाती है। एकत्रित डाटाओं विश्लेषण किया जाता है। विश्लेषण के आधार पर परीक्षण की जाती है। परीक्षणों से प्राप्त परिणामों के निष्कर्ष निकाला जाते हैं। निष्कर्ष के आधार पर यह तय होती है कि घटना की वास्तविकता क्या है। विज्ञान प्रयोगों से प्राप्त जानकारियां होती है। किसी भी तथ्य को वैज्ञानिक कसौटी से पास होने के लिए काफी लंबा समय, धन, एकाग्रता और निरंतर प्रयोग की आवश्यकता होती है। 

जबकि अंधविश्वास में किसी भी तथ्य को स्थापित होने के लिए कोई निश्चित मापदंड या तरीका नहीं है। इनकी व्याख्या मनगढ़ंत और अतार्किक होती है। किसी भी घटना के कारणों के बारे में अपने अनुभव के आधार पर अदृश्य शक्ति के साथ जोड़ देते हैं। यह बहुत ही सरल सिंपल , मुक्त और तीव्र है। 

अंधविश्वास विकास का सबसे बड़ा बाधक

अंधविश्वास और विज्ञान दोनों एक दूसरे के विपरीत ध्रुव हैं। एक ही घटनाओं को लेकर दोनों का नजरिया बिल्कुल भिन्न है । अशिक्षा और अंधविश्वास दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। जहां अंधविश्वास होगा वहां विकास की उत्कृष्टता हो ही नहीं सकती। अंधविश्वास की व्यापकता अशिक्षा पर ही निर्भर करता है। मनुष्य इस पृथ्वी पर सबसे ज्यादा विकसित और परिवर्तनशील प्राणी है । भारत के प्रसंग में अंधविश्वास की अगर बात करें तो बहुत बड़ा जनसंख्या अंधविश्वास के गिरफ्त में है। अंधविश्वास ऐसी मानसिक बीमारी है जो वास्तविक कारणों से कोसों दूर रखती है। सच्चाई तक कभी पहुंचने ही नहीं देती। यह नया कुछ जानने से रोकती है। वैचारिक जड़ता उत्पन्न होती है। यह हमें भाग्य के भरोसे जीना सिखाती है। जिस वजह से प्रोडक्टिविटी रुक जाती है। यह मन में अनिश्चितता और अनजान भय का माहौल उत्पन्न करती है। अंधविश्वास से ग्रसित आदमी हमेशा व्याकुल और डरा हुआ होता है। अंधविश्वास में लोग ऐसे ऐसे काम करते हैं जो हास्य का कारण बनता है। 

अंधविश्वास फैलती कैसे हैं

हमारे समाज में फैले ज्यादातर अंधविश्वास हानि रहित होता है।अंधविश्वास हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन गया है। यह सब हमें बिल्कुल नॉर्मल सी बात लगता है। बस हम उसके महत्व और कारण को जाने बगैर, अनुसरण करते ही चले जाते हैं । अंधविश्वास को या तो हम अपने समाज से सीखते हैं या फिर अपने परिवार से। लगातार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक बने रहने के कारण यह हमारे परंपरा का हिस्सा बन जाता है । इसी तरह से अगर कोई अंधविश्वास धर्म का हिस्सा बन जाता है तो, उस अंधविश्वास को, धर्म का सह मिल जाता है । जिस अंधविश्वास को धर्म का सपोर्ट मिलता है या धर्म का हिस्सा बन जाता है, फिर बाद मे यह संसय का कारण बन जाता है। 

भारत में प्रचलित कुछ हानिरहित अंधविश्वास के प्रकार

बिल्ली का रास्ता काटना। - अशुभ
रात को काली बिल्ली का आवाज। -अशुभ
बन रहे नये घर के बाहर झाड़ू, चप्पल, सूप या नागफनी के कांटे को टंगना। -टोटका
सुबह सुबह घर के बाहर कौवे का आवाज करना। -अशुभ समाचार
खाते समय छींकना। - किसी का याद करना
खड़ा होकर खाने से खाना घुटने में चला जाता है। -मिथ
कोई भी शुभ कार्य या परीक्षा में जाने से पहले दही खाकर निकलना। -शुभ
जोड़े में मैना का दिखना। -शुभ
सिक्के को नदी मे फेकना। शुभ
दक्षिण की ओर सिर करके नहीं सोना। -अशुभ
बच्चों में हिचकी को रोकने के लिए सूती कपड़े का गाँठ को माथे मे रखना। -टोटका
टूटी हुई आइना को देखना। -अशुभ
दाहिने आँख का फड़कना। 
हाथों में खुजली होना। 
खाते समय हिचकी का आना। -याद किये जाना। 
घर के बाहर नींबू मिर्च लटकाना। 

और ना जाने कितने ही ऐसे उदाहरण हैं। 

अंधविश्वास से कौन लोग ज्यादा प्रभावित हैं

अंधविश्वास का सीधा संबंध अज्ञानता से है। जहां शिक्षा की कमी होगी वहां अंधविश्वास होगा। ज्यादातर अशिक्षित लोग अंधविश्वास पर विश्वास करते हैं। कोई भी ऐसी घटना नहीं होती है जो बिना किसी कारण के घटित हो। हर घटना के पीछे कोई ना कोई कारण होती जरूर है। सभी घटनाओं के पीछे या तो भौतिक कारक होती हैं, रासायनिक कारक होती हैं या मनोवैज्ञानिक कारक। लेकिन अज्ञानता वस या जानकारी के अभाव में घटित घटनाओं के कारणों के पीछे, ऐसी शक्ति के ऊपर दोष  दिया जाता है जो exist ही नहीं करती । 

वैसे समुदाय जो मुख्यधारा से कटा हुआ होता है । जिनका अन्य लोगों के साथ मेल मिलाप या जुड़ाव नहीं हो । दूरदराज वाले इलाके, जहां सड़क कनेक्टिविटी और सरकारी योजनाओं की पहुँच बहुत कम हो । जाहिर सी बात है वहां शिक्षा का स्तर निम्न होगा। यहां अंधविश्वास से ज्यादा लोग घोषित होंगे। अंधविश्वास की घटनाएं यहां ज्यादा देखने और सुनने को मिलेंगी । 
यह तो सिर्फ कहने को है कि  गांव और अशिक्षित लोग ही अंधविश्वासी होते हैं। लेकिन आपको यह जानकर बड़ा ताज्जुब होगा कि पढ़े लिखे लोग भी अंधविश्वासी होते हैं और अंधविश्वास को फॉलो करते हैं । 

अंधविश्वास और काम मे प्रभाव

इस कथन को चरितार्थ करने वाली एक घटना की चर्चा करते हैं। यह बात बहुत पहले की है। किसी कालखंड में एक बड़ा प्रसिद्ध व्यापारी हुआ करता था। उनका बड़ा नाम था। उसे राजा के महल में किसी सामान की आपूर्ति के लिए कॉन्ट्रैक्ट मिला। व्यापारी बहुत खुश था। उसने सामान एकत्रित करना शुरू कर दिया। निश्चित तयशुदा तारीख को विशेष अनुष्ठान के लिए सामान की डिलीवरी देनी थी। उसने सारा सामान बैलगाड़ी में लादकर सामान के डिलीवरी के लिए राजा के महल की ओर चल दिया। कुछ ही दूर गया होगा की एक बिल्ली ने रास्ता काट दिया। अशुभ संकेत मानकर व्यापारी वापस घर को लौट गया। उधर लोग व्यापारी का इंतजार करते रहे। नहीं आने के कारण को जानकर राजा ने उस व्यापारी को दिए सभी व्यापारिक कॉन्ट्रैक्ट, जुर्माना के साथ बंद करवा दिया ।  समाना पूर्ति के लिए राजा को तत्काल में किसी दूसरे व्यापारी से सम्पर्क करना पड़ा। राजा उनके काम से खुश होकर उन्हें ढेर सारे हीरे जवाहरात और उपहार दिए।
इसी तरह हमारे लाइफ में भी कई एक ऐसी घटनाएं होती है जिसको हम अशुभ संकेत मानकर अपना काम को छोड़ देते हैं या किसी और दिन के लिए टाल देते हैं। प्रोफेशनलिज्म को लेकर लोगों को हमारे ऊपर शक होने लगता है फिर भी हम से काम लेना बंद कर देते हैं। बहुत बार ऐसा होता है कि हमारे द्वारा छोड़ा गया काम फिर कभी शुरू हो ही नहीं पाता या फिर बहुत देर हो जाता है।

अंधविश्वास और व्यक्तित्व

अंधविश्वास के साए में रहने वाले व्यक्ति का व्यक्तित्व कमजोर, भयभीत और संकुचित मानसिकता वाला होता है। वह हमेशा झूठसच को, सच मान रहा होता है । सुनी सुनाई और मनगढ़ंत सच के उपर उसका अटूट विश्वास होता है। जब कभी भी उसका विश्वास टूटता है या विश्वास के खिलाफ कोई काम हो रहा होता है तो उसका विरोध करता है। आंखों में लगा पर्दा हटता है यह सच्चाई से रूबरू होता है तो बड़ा शर्मिंदगी महसूस करता है। फिर लोगों के लिए हास्य का कारण बनता है।

अंधविश्वास और मानसिक जडता

अंधविश्वास हमें कुछ नया करने से रोकती है। सदियों से चले आ रहे पारंपरिक तौर तरीके को बनाए रखने में जोर देती है । हमें सिर्फ जोन में रहने को मजबूर करती है। हमें सवाल करने से रोकती है। 

अंधविश्वास को बल

अंधविश्वास को मिलने वाला बल, सबसे ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि उसका अनुसरण कितना प्रतिष्ठित व्यक्ति कर रहा है । चाहे वह प्रतिष्ठित व्यक्ति लोगों का दिल जीतने या उनसे जुड़ने के लिए  ही क्यों ना कर रहा हो , लेकिन इसका प्रभाव आम लोगों या fans के ऊपर बहुत ज्यादा पड़ता है । क्योंकि आम लोग प्रतिष्ठित लोगों को अनुसरण करना चाहते हैं। उन्हें रोल मॉडल मानते। वैसे प्रतिष्ठित लोगों को पब्लिकली अंधविश्वास को फॉलो करने से बचना चाहिए क्योंकि उन्हें फॉलो करने वाला बहुत होते हैं। चाहे वह राजनेता हो, फिल्म स्टार हो, टीवी एंकर हो,खिलाडी हो,शिक्षक हो या कोई famous personality हो। टीवी प्रोग्राम और फिल्मों के कुछ कंटेंट ऐसे होते हैं जो अंधविश्वास को पोषित करती हैं। ये कंटेंट जनमानस के मस्तिष्क में बैठ जाती हैं। 

अंधविश्वास से प्रेरित अपराध

अभी के दौर में जब विज्ञान ने हर क्षेत्र में इतना प्रगति किया है, लेकिन फिर भी,जब कभी अंधविश्वास से प्रेरित घटनाएं देखने और सुनने को मिलती है, तो दिल को बड़ा आहत आहत पहुंचती है। जैसे कि काला जादू और डायन प्रथा। इस तरह की ज्यादातर घटनाएं सुदूरवर्ती इलाकों या ऐसे समुदाय में ज्यादा होता है जहां शिक्षा का स्तर बहुत कम या नहीं के बराबर होता है। किसी भी अप्रिय घटनाओं का कारण काला जादू या डायन प्रथा को माना जाता है। आरोपित व्यक्ति के साथ अज्ञानता वस मारपीट, लड़ाई झगड़ा और समाज से बहिष्कृत किया जाता है। जबकि उस आदमी विशेष का इस घटना के साथ कोई संबंध नहीं होता है। बहुत बार अप्रिय घटनाओं का संबंध पूर्व जन्म के पाप के साथ जोड़ा जाता है। 
विज्ञान के इस युग में अंधविश्वास से प्रेरित अपराध प्रगतिशील मानव समाज के लिए अभिशाप है।


लेख को सुनने के लिए इस लिंक पर click करें। https://youtu.be/lT9xrqbEOW0




ध्यान पूर्वक इस लेख को पढ़ने के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूं। आशा करता हूं इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हुई होगी । प्रेरणादायक उपयोगी लेख को पढ़ने के लिए जुड़े रहे। 
धन्यवाद

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